Khayaal

जब मन पीड़ा से फटता हो

जब सिर्फ अँधेरा दिखता हो

जब दूर तुम्हारा साथी हो

जब आवाज ना उस तक जाती हो

जब पानी आँखों से बहता हो

जब वक्त ना तेरा कटता हो

तब ओढ़ के अपना दुख तुम

मेरे पास चले आना

कुछ और नहीं बस साथ अपने

तुम बांध व्यथा अपनी लाना

मैं राह नहीं दिखला पाऊ

मैं काम भले ना आ पाऊ

पर साथ तुम्हारे बैठूंगा

और दुख के कान मैं ऐठूंगा

और साथ मुझे तुम पाओगे

जब जब भी तुम घबराओगे

फ़िर जीवन जब आसान लगे

दिखने में नया आसमां लगे

जब सूरज फिर से उगने लगे

और स्याह रात ढलने लगे

तुम लौट जाना अपनी दुनिया में

मैं दूंगा पीछे से आवाज नहीं

पर फिर कभी अगर जरूरी हो

मैं बैठा मिलूंगा तुम्हें वही

One response to “Khayaal”

  1. aceynpasquariello1990 Avatar
    aceynpasquariello1990

    wow!! 93Khayaal

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