सफ़र

किसी खाली मकान सी लगती है,
तेरे बिन जिंदगी इम्तिहान सी लगती है।
चलते चलते रुक जाता हूं बेदस्तूर सा
तेरे बिन हर मंजिल बे-निशान सी लगती है।
दिल को अब सुकून का पता ही नहीं,
तेरे बिन हर ख़ुशी वीरान सी लगती है।

Leave a comment