किसी खाली मकान सी लगती है,
तेरे बिन जिंदगी इम्तिहान सी लगती है।
चलते चलते रुक जाता हूं बेदस्तूर सा
तेरे बिन हर मंजिल बे-निशान सी लगती है।
दिल को अब सुकून का पता ही नहीं,
तेरे बिन हर ख़ुशी वीरान सी लगती है।
किसी खाली मकान सी लगती है,
तेरे बिन जिंदगी इम्तिहान सी लगती है।
चलते चलते रुक जाता हूं बेदस्तूर सा
तेरे बिन हर मंजिल बे-निशान सी लगती है।
दिल को अब सुकून का पता ही नहीं,
तेरे बिन हर ख़ुशी वीरान सी लगती है।
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